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26 January 2011

'ब्लॉकबस्टर' और 'ब्लूमून' का मतलब..?


मून बलून
आप ने बॉलीवुड और हॉलीवुड की फ़िल्मों के बारे में अक्सर ‘ब्लॉकबस्टर’ शब्द का प्रयोग देखा होगा लेकिन क्या आपको मालूम है कि ये होता क्या है?
नीचे लिखे वाक्यों को देखें कि इनमें किस तरह ‘ब्लॉकबस्टर’ शब्द का प्रयोग हुआ है
Kate Winslet came into prominence from starring in the Hollywood blockbuster Titanic. या फिर Ramgarh Ke Sholay is a parody of the 1975 Bollywood blockbuster Sholay.
इन वाक्यों में आपने देखा कि किस प्रकार की फ़िल्मों के लिए ब्लॉकबस्टर का प्रयोग किया गया है. इन दोनों वाक्यों को हिंदी में इस प्रकार लिखेंगे:
केट विंस्लेट हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर टाईटैनिक में अभिनय के बाद मशहूर हुईं. रामगढ़ के शोले 1975 की बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर शोले की नक़ल है.
फ़िल्म ‘शोले’ या ‘टाईटैनिक’ के संदर्भ में यह बात सामने आ चुकी है. यानी हम बहुत ही मशहूर, चर्चित और हिट फ़िल्म, किताब और नाटक के लिए इसका प्रयोग करते हैं.
इसी लेख से
आप अब तो ‘ब्लॉकबस्टर’ का मतलब ज़रूर समझ गए होंगे कि इसका प्रयोग बहुत ज़्यादा हिट और लोकप्रिय चीज़ों के लिए होता है. लेकिन क्या आप को मालूम है कि यह शब्द कैसे बना और इसका और क्या प्रयोग है.
ब्लॉकबस्टर
आज का हमारा पहला शब्द है ब्लॉकबस्टर (Blockbuster). Blockbuster दो शब्दों ‘ब्लॉक’ और ‘बस्ट’ (block and bust) से मिलकर बना है और इसका तीन अर्थों में प्रयोग होता है
इसका पहला इस्तेमाल दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था. ब्लॉकबस्टर इतने बड़े बम को कहा जाता था जिसमें एक शहर को बरबाद करने की क्षमता हो.
यह पहली बार शहरों के एक क्षेत्र या इलाक़े जिसे ब्लॉक कहा जाता है उसे ‘बस्ट’ (bust) या ध्वस्त करने के शाब्दिक अर्थ में प्रयोग किया गया.
लेकिन जल्द ही इसका दूसरा अर्थ सामने आया और इसे किसी मूवी, किताब या नाटक की बहुत ज़्यादा शोहरत/ख्याति के लिए प्रयोग किया जाने लगा. इसका प्रयोग भी बड़े धमाके के तौर पर ही लिया गया जिसकी चपेट में बहुत से लोग आए हों.
फ़िल्म ‘शोले’ या ‘टाईटैनिक’ के संदर्भ में यह बात सामने आ चुकी है. यानी हम बहुत ही मशहूर, चर्चित और हिट फ़िल्म, किताब और नाटक के लिए इसका प्रयोग करते हैं.
केट विंस्लेट
लोकप्रिय और सफल फ़िल्मों के लिए ब्लाकबस्टर शब्द का प्रयोग किया जाता है.
इसका तीसरा प्रयोग ज़मीन और मकान बेचने वाले रियल स्टेट एजेंट के लिए होता है. ब्लॉकबस्टर ऐसे एजेंट को कहते हैं जो गोरे लोगों के इलाक़े, कालोनी या ब्लाक में किसी काले परिवार के हाथों मकान या ज़मीन बेचता है.
अगर एक बार किसी ब्लॉक में सेंध पड़ गई यानी एक काले या किसी दूसरे अल्पसंख्यक परिवार के हाथ गोरे लोगों के ब्लॉक, कॉलोनी या मुहल्ले में मकान या ज़मीन बेच दी गई तो दूसरे मकानों और ज़मीनों की क़ीमत में भारी गिरावट आ जाती और उसे दूसरे अल्पसंख्यक परिवार को बेचा जाने लगता. यहां भी इसका ‘ब्लॉक’ और ‘बस्ट’ के शाब्दिक अर्थों में प्रयोग हुआ है.
वैसे आजकल ब्लॉकबस्टर शब्द का प्रयोग मुक्केबाज़ी के मुक़ाबले में भी काफ़ी लोकप्रिय है.
ब्लूमून
दूसरा शब्द है ब्लूमून (Blue Moon)
आपने नीला आकाश तो ज़रूर देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी नीला चांद देखा है. नीले रंग के मुहावरे वाले लेख में ‘ब्लू’ शब्द वाले कई मुहावरों के बारे में बताया जा चुका है. आप को वे सारे प्रयोग याद होंगे, उसके आधार पर आप समझ सकते हैं कि यहां ‘ब्लू मून’ का मतलब नीला चांद नहीं बल्कि कुछ और है.
पहले पहले ब्लू मून को एक ही महीने में दो बार दिखाई देने वाले दूसरे पूर्णिमा को कहा जाता था जोकि बहुत ही कम मौक़ों पर संभव है.
अंग्रेज़ी महीना प्रायः 30.5 दिन का होता है और चाँद का महीना 29.5 दिन का, इस प्रकार सौ साल में ऐसा 41 बार होता है जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा हो. आज इसका प्रयोग किसी घटना के बहुत कम घटित होने के लिए होता है यानी इसका इस्तेमाल विरल या not often, और rare के लिए होता है.
चांद
ब्लूमून कभी देखा गया था लेकिन इसका प्रयोग सिर्फ़ मुहावरे में होता है.
इसका प्रयोग किसी ऐसी घटना के बारे में भी होता है जो कभी न घटित हो क्योंकि हम कभी ऐसा चाँद नहीं देखते हैं जो नीला हो. लेकिन वास्तव में चाँद उस वक़्त नीला हो सकता है जब वातावरण में बहुत सारा गर्द-ग़ुबार या धुआं फैल जाए जैसा कि वर्ष 1951 में कनाडा के जंगल में लगने वाली आग या वर्ष 1883 में कराकटवा में ज्वालामुखी के फटने के बाद चांद नीला दिखने लगा था.
इस से बनने वाला एक और मुहावरा है Once in a blue moon (वंस इन ए ब्लू मून). उर्दू और हिंदी में ‘ईद का चांद’ के रूप में इसका प्रयोग करते हैं.
ईद के चाँद
अगर आपको कोई यह कहे कि ‘भाई आप तो ईद का चांद हो गए हैं’ तो इसका मतलब है आप दिखाई नहीं देते हैं. ईद का चांद देखने के लिए मुसलमान आसमान पर टकटकी लगाए देखते रहते हैं लेकिन वह कभी दिखता है और कभी नहीं दिखता है.
ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक़ इसे पहली बार वर्ष 1528 में इस प्रकार इस्तेमाल किया गया.
If they say the moon is blue,
We must believe that it is true
(अगर वे कहते हैं कि चांद नीला है, तो हमें विश्वास करना चाहिए कि यह सही है)
लेकिन इसका आधुनिक प्रयोग वर्ष 1821 में शुरू हुआ और इस का प्रयोग हर उस अवसर की अभिव्यक्ति के लिए किया जाने लगा जो विरल और कम घटित होने वाला हो.
19वीं शताब्दी में एक और मुहावरा प्रयोग किया जाने लगा until a blue moon (अंटिल ए ब्लू मून) जिसका अर्थ था कभी नहीं, Never.

डन्स (Dunce) शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?


डन्स
डन्स कैप उनको पहनाई जाती है जिनकी बुद्धी मंद होती है जैसे तस्वीर में नज़र आ रहा छात्र
आपने हमारे पहले के लेख में 'बॉयकॉट' शब्द की उत्पत्ति के बारे में पढ़ा होगा और आपने शब्दों के महाजाल में उन शब्दों के बारे में भी पढ़ा होगा जो अब बिल्कुल ही उल्टे अर्थ में प्रयुक्त हैं.
आज हम जिस शब्द की बात कर रहे हैं वह हमारे दैनिक जीवन की शब्दावली में शामिल है और वह शब्द है ‘डन्स’ जिसका अर्थ तो न बदला है लेकिन जिस व्यक्ति के नाम पर उसे रखा गया है उसके साथ बड़ी नाइंसाफ़ी हुई है.
किसी शायर ने इसकी अभिव्यक्ति के लिए कितना ख़ूबसूरत शेर कहा है....
ख़िरद का नाम जुनूं रख दिया जुनूं का ख़िरद
जो चाहे आप का हुस्न-ए-करिशमा-साज़ करे

यहां ख़िरद का अर्थ होशियारी है और जुनूं का मतलब पागलपन और हुस्ने-करिशमा-साज़ का अर्थ हुआ करिश्मा करने वाला सौंदर्य है. अब किसी प्रकार की व्याख्या की ज़रूरत तो नहीं है.
तो बात करते हैं डन्स (dunce) की
डन्स की उत्पत्ति उस व्यक्ति के नाम पर है जिसका शुमार अपने ज़माने के सबसे होशियार आदमी में होता था, और 13वीं शताब्दी के उस धर्मशास्त्री और बुद्धिजिवी का नाम था जॉन डन्स स्कॉटस. धर्मशास्त्र, दर्शन और तर्कशास्त्र पर उनकी किताबें विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती थीं.
अंग्रेज़ी में इसके पर्याय के रुप में stupid, dolt, donkey, ass, duffer, loon, moron, fool, simpleton, dimwitted, unintelligent, brainless, blockhead, bonehead, dunderhead, hammerhead, knucklehead, loggerhead, muttonhead, numskull, dullard, poor fish, pudding head, इतने सारे शब्दों का प्रयोग होता है. इसके अलावा बहुत से अप-शब्द यानी सलॉंग और भी है.
इसकी उत्पत्ति उस व्यक्ति के नाम पर है जिसका शुमार अपने ज़माने के सबसे होशियार आदमी में होता था, और 13वीं शताब्दी के उस धर्मशास्त्री और बुद्धिजिवी का नाम था जॉन डन्स स्कॉटस. धर्मशास्त्र, दर्शन और तर्कशास्त्र पर उनकी किताबें विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती थीं.
आप सोचेंगे कि उन्होंने ऐसा क्या कर दिया कि लोगों ने उनके नाम को मूर्खता का पर्याय मान लिया. तो सुन लिजिए उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया और अपने जीवन में नाम और मान के साथ रहे.
उनके दर्शन, धर्मशास्त्र और तर्कशास्त्र को मानने वालों को ‘डन्सेज़’ या ‘डन्समेन’ कहा जाता था और जिनकी बाल की खाल निकालने वाली प्रक्रिया को नकार दिया गया. बहुत से मामलों पर उनके तर्क को ख़ारिज कर दिया गया लेकिन वह अपनी बात पर सख़ती से डटे रहे.
सुधारकों ने उनकी हठधर्मी से तंग आकर उनके लिए यह कहना शुरू कर दिया कि ‘वे डन्स लोग हैं’ वे कहां समझेंगे जिससे यह अभिप्राय होता था कि डन्स सिद्धांत को मानने वाले आम तौर पर मूर्ख हैं, उनके पास भेजा नहीं है.
डन्स कैप
टॉम एंड जेरी
टॉम और जेरी नामक कार्टून में दोनों पात्र एक दूसरे को मूर्ख बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
डन्स सिर्फ़ एक शब्द नहीं है बल्कि अपने आप में एक परंपरा है, जिस तरह आज हॉल ऑफ़ फ़ेम और हॉल ऑफ़ शेम दोना प्रकार का पुरस्कार दिया जाता है और आलोचना के लिए विभिन्न प्रकार के तरीक़े अपनाए जाते हैं उसी प्रकार पश्चिमी देशों के स्कूलों में मंद बुद्धि के छात्रों को सज़ा के तौर पर डन्स कैप यानी एक शंक्वाकार टोपी पहनाई जाती थी ताकि उसे कुछ शर्म आए.
अब तो यह परंपरा आम नहीं है लेकिन आप कार्टूनों में देखेंगे कि किस प्रकार टॉम जेरी को डन्स कैप पहनाता है और जेरी टॉम को. या फिर टीवी शो के दौरान देखेंगे कि किसी के बेवक़ूफ़ बन जाने पर उसके सर पर एक कोनीकल टोपी पहना दी जाती है जिस पर डन्स या सिर्फ़ डी (D) लिखा होता है.
यह भी अजीब बात है कि जॉन डन्स स्कॉटस का विचार था कि शंकूनुमा टूपी पहनने से दिमाग़ में ज्ञान की कुछ रौशनी ज़रूर जाती है. लेकिन 16वीं शताब्दी में उनके विचार का इतना विरोध हुआ कि उनके नाम पर उसी प्रकार की टोपी प्रचलित हो गई और उसका मतलब यह निकाला गया कि जिसके दिमाग़ में ज्ञान न घुस पाए.
हालांकि मूर्ख और मंदबुद्धि के रूप में डन्स का प्रयोग और प्रचलन बहुत पहले हो गया था लेकिन इसका लिखित प्रमाण 1624 से पहले सामने नहीं आता है जब जॉन फ़ोर्ड ने अपने नाटक ‘संस डार्लिंग’ में मंदबुद्धि के छात्रों के लिए ‘डन्स टेबुल’ का प्रयोग किया जहां उन्हें सबसे अलग रखा जाता था.
इसी प्रकार ‘डन्स कैप’ का पहली बार प्रयोग 1840 में सामने आता है जब प्रसिद्ध उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस अपने उपन्यास ‘ओल्ड क्यूरियोसिटी शॉप’ में इसका प्रयोग करते हैं.
इस से जुड़े शब्द
डन्स कैप
डन्स कैप पुराने ज़माने में स्कूलों में प्रचलित थी.
डन्स का प्रयोग शुरू में तो अपमानित करने के लिए किया गया लेकिन बाद में हर प्रकार के मूर्खों के लिए होने लगा. फिर क्या था उनकी श्रेणियां भी बनने लगीं और फिर आया शब्द duncedom यानी wisdom का विपरीत और उसी से फिर बना duncery यानी मूर्खता, मूढ़ता, विदूषकत्व,
अंग्रेज़ी के महान कवि, सबसे बड़े वयंगकार और आलोचक अलेक्ज़ैन्डर पोप (मई 1688- मई 1744) ने अपने ज़माने के घटिया लेखकों और आलोचकों का चित्रण अपनी किताब ‘द डन्सियाड’ (The Dunciad) में किया है मानो वह मंदबुद्धियों पर लिखा गया महाकाव्य है.
‘डन्सियाड’ तीन बार में प्रकाशित हुआ जिसमें प्रसिद्ध कवि, व्यंगकार और आलोचक जॉन ड्राईडेन की किताब ‘मैक-फ़्लेकनो’ (MacFlecknoe) के अंदाज़ में पोप ने अपने ज़माने के निम्नस्तर के लेखकों और स्क्रिबलेरियन कलब के सदस्यों को निशाना बनाया गया है.
जॉन ड्राईडेन ने अपनी किताब ‘मैक-फ़्लेकनो’ में बेवक़ूफ़ी का ताज अपने प्रतिद्वंदी कवि थॉमस शैडवेल के सर पर रखा है तो पोप ने सुस्सती और मंदबुद्धि का सेहरा स्क्रिबलेरियन कलब के सदस्यों के सर किया है.
हमारे यहां भी एक मुहावरा मश्हूर होता जा रहा है टोपी पहनाना, यानी चूना लगा देना, यानी बेवक़ूफ़ बनाना या ठग लेना. तो यह टोपी पहनने और पहनाने का काम तो चलता रहेगा और शायद इसी लिए उर्दू के प्रसिद्ध कवि मीर ने कहा है कि अपनी दस्तार यानी पगड़ी यानी टोपी को ठीक से पकड़ें.
मीर साहब ज़माना नाज़ुक है
दोनों हाथों से थामिए दस्तार

Movie शब्द का प्रचलन कैसे शुरू हुआ?


मूवी
अगर आप से ये पूछा जाए कि आपकी पसंदीदा वीटास्कोप क्या है तो आप शायद इसका जबाव न दे पाएँ. लेकिन अगर इसके बजाए ये पूछा जाए कि आपकी पसंदीदा मूवी कौन सी है तो आप तुरंत ही किसी फ़िल्म का नाम लेंगे.
फ़िल्मों को लेकर कहीं न कहीं हम मूवी शब्द का प्रयोग करते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि फ़िल्मों को मूवी का नाम कैसे दिया गया.
आज हम जिस शब्द की चर्चा कर रहें हैं वह शब्द है:

MOVIE (मूवी)

1912 में न्यूयॉर्क के एक प्रकाशन में "Movies' and the Law" के शीर्षक को इस बात का श्रेय जाता है कि वहीं मूवी शब्द पहली बार प्रयोग में आया और फिर लोगों ने फ़िल्मों को आम तौर पर मूवी कहना शुरू कर दिया.
इसी लेख से
हिंदी में हमने इसका सीधा सीधा अनुवाद चलचित्र के तौर पर कर लिया है लेकिन पहली बार इसका प्रयोग अमरीका के लोगों ने किया था.
नामकरण या नाम रखने को हमारे समाज में काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है और जब ये किसी आविष्कार को लेकर हो तो उसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है और बहुत सोच बिचार के बाद ही नाम रखा जाता है.
लेकिन कभी कभी ऐसा भी होता है कि मज़ाक़-मज़ाक में कोई नाम चल निकलता है और वही उसकी पहचान बन जाता है.
1912 में न्यूयॉर्क के एक प्रकाशन में "Movies' and the Law" के शीर्षक को इस बात का श्रेय जाता है कि वहीं मूवी शब्द पहली बार प्रयोग में आया और फिर लोगों ने फ़िल्मों को आम तौर पर मूवी कहना शुरू कर दिया.
फ़िल्म निर्माण की कला से जुड़े लोगों, ख़ास कर फ़िल्म निर्माताओं ने अपनी इस उत्कृष्ट कला को ऐसे बाज़ारी और चालू नाम दिए जाने पर खेद प्रकट किया.
उन्होंने मूवी शब्द को अपनाने से इंकार कर दिया क्योंकि 19वीं शताब्दी में नाम रखने का अपना ही भव्य अंदाज़ था.
19वीं सदी में काफ़ी आविष्कार हुए और उनके महत्व को दिखाने और उन्हें क्लासिकी रंग देने के लिए उनके नाम रखने में यूनानी शब्दों के प्रयोग को बहुत अहमियत दी जाती थी.

नामकरण

कैमरा
थॉमस एडीसन ने जब कैमरे (Camera) का आविष्कार किया तो अपने कैमरे का नाम काइनेटोग्राफ़ (kinetograph) रखा
इसी लिए थॉमस एडीसन ने जब कैमरे (Camera) का आविष्कार किया तो अपने कैमरे का नाम काइनेटोग्राफ़ (kinetograph) रखा, जोकि यूनानी मूल के शब्द ‘Kinetic’ (गति) और ‘graph’ (लिखने) को मिला कर बनाया गया था.
इसी प्रकार जब उन्होंने प्रॉजेक्टर बनाया तो उसका नाम काइनेटोस्कोप (kinetoscope) रखा जो कि यूनानी मूल के शब्द ‘kinetic’ (गति) और ‘scope’ (दृश्य) को मिला कर बनाया गया था.
एक दशक बाद एक और यंत्र बना जिसे बॉयोग्राफ़ (biograph) कहा गया जो ‘जीवन’ (bio) और ‘लिखने’ (graph) को लेकर बना था.
उन्नीसवीं शताब्दी में नामकरण की यही प्रथा प्रचलित रही और हमें टेलीग्राफ़ (telegraph -1805), फ़ोटोग्राफ़ (photograph -1839), टेलीफ़ोन (telephone -1876), फ़ोनोग्राफ़ (phonograph -1877), काईनेटिक्स (kinetics -1864), काईनेसिओलोजी (kinesiology -1894), लीथोग्राफ़ (lithograph -1825), सीज़मोग्राफ़ (seismograph -1858), कैलेडिस्कोप (kaleidoscope -1817), पेरिस्कोप (periscope -1879) आदि शब्द मिले जो यूनानी मूल से बने हैं.
1920 के दशक में टॉकीज़ शब्द का इस्तेमाल कम हो गया और फिर जब हर फ़िल्म में आवाज़ का इस्तेमाल होने लगा तो फिर से फ़िल्मों के लिए आम तौर पर ‘मूवी’ शब्द का ही प्रयोग होने लगा.
इसी लेख से
हालांकि मोशन पिक्चर का आविष्कार 1889 में हो चुका था लेकिन थॉमस एडीसन ने इसे अपने आविष्कार को वीटास्कोप (Vitascope) नाम दिया था जिसका मूल यूनानी भाषा में था.
लेकिन सारी कोशिशों के बाद भी फिल्मों को दिखाने और बनाने वाले इसे इसके नए नाम मूवी को नहीं हटा सके.
कुछ दिनों बाद उन्होंने अपनी फ़िल्मों में आवाज़ भी शामिल कर दी. इसके बाद फ़िल्मों को कुछ दिनों तक टाकीज़ (talkies) कहा जाने लगा.
1920 के दशक में टॉकीज़ शब्द का इस्तेमाल कम हो गया और फिर जब हर फ़िल्म में आवाज़ का इस्तेमाल होने लगा तो फिर से फ़िल्मों के लिए आम तौर पर ‘मूवी’ शब्द का ही प्रयोग होने लगा.
1920 के ही दशक में फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों ने ‘अकादमी ऑफ़ मोशन पिक्चर आर्ट एंड साइंस’ (Academy of Motion Picture Arts and Sciences) की स्थापना की और हर वर्ष उसी की ओर से ऑस्कर पुरस्कार दिया जाने लगा.
सिनेमा एक ऐसी कला है जिसका संबंध आम लोगों से ज़्यादा है और ये वो माध्यम है जो उत्कृष्ट लोगों से ज़्यादा आम जनता के लिए है.
इसी लिए आज भी उस पर जनता का दिया हुआ नाम ‘मूवी’ यूनानी मूल के नाम ‘वीटास्कोप’ या ‘बाईस्कोप’ से ज़्यादा फबता है.

ओके का कैसे हुआ चलन?


ओके
हेलो (Hello) के बाद अंग्रेज़ी का सब से ज़्यादा प्रयोग में आने वाला शब्द शायद ‘ओके’ (OK) है. और अगर इस शब्द की पृष्ट-भूमि खंगालिए तो विचित्र कहानियाँ सुनने को मिलती हैं.
हालांकि आज कल ओके को छोटा बड़ा हर कोई बिना हिचक बड़ी सहजता से प्रयोग में लाता है, लेकिन हम अपने नवयुवक पाठकों को इस बात से अवगत करा दें कि कुछ दशक पहले इस शब्द के साथ ऐसी स्थिति नहीं थी.
ख़ुद मेरे छात्र-जीवन के समय इस शब्द को बाज़ारी समझा जाता था.
हमें याद है कि हमारे दर्शनशास्त्र की कक्षा के प्रोफ़ेसर शाहिद अली ने एक छात्र को एक सौ बार ‘All Right’ लिखने और फिर उसको सौ बार बोलने की सज़ा दी थी, क्योंकि उस छात्र ने प्रोफ़ेसर साहेब की आज्ञा के पालन के लिए ‘OK Sir’ कह दिया था.
बाद में प्रो. शाहिद अली ने सारी क्लास को चेतावनी देते हुए कहा था कि ‘अगर किसी और ने भी अधिक ‘YANKEE’ बनने की कोशिश की तो उसकी भी वैसी ही दुर्दशा होगी’.
वैसे तो ‘यांकी’ शब्द ख़ुद भी अपना एक दिलचस्प इतिहास रखता है लेकिन उस पर आगे कभी बात करेंगे, आज हम अपनी बात ओके तक ही सीमित रखते हैं.

शुरुआत

ऐंड्रियु जैकसन
कहा जाता है कि अमरीकी राष्ट्रपति जैकसन ने इसका प्रयोग किया था.
इस शब्द की शुरूआत के बारे में सबसे आम ख़्याल तो यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति ऐड्रू जैक्सन ने All Correct के स्थान पर उसके संक्षिप्त रूप oll correct के ग़लत हिज्जे अथवा ओके का चलन किया.
यह कहानी जब भारत और पाकिस्तान तक पहुंची तो लोगों ने राष्ट्रपति का पात्र बदल कर वहां जार्ज वाशिंगटन या अब्राहम लिंकन को ला बिठाया.
यह कहानी जितनी पॉपुलर है उतनी ग़लत भी है क्योंकि किसी अमरीकी राष्ट्रपति के संदर्भ में इस प्रकार की किसी हरकत का प्रमाण नहीं मिलता है.
इस से ज़रा अच्छी और विश्वसनिय कहानी राष्ट्रपति पद के एक उम्मीदवार के बारे में है जिसका चुनाव अभियान सन 1800 ई. के क़रीब शुरू हुआ था.
उम्मीदवार का पुश्तैनी गांव न्युयार्क राज्य में था और उसका नाम था Old Kinderhook. इसलिए उसके समर्थकों ने उसी नाम के प्रारंभ के अक्षरों को लेकर एक OK ग्रुप बना लिया, और हर ओर इसी शब्द को ख्याति दी.
अमरीकी रेलवे के शुरू के समय में एक पोस्टल कलर्क की भी दास्तान मिलती है जिसका नाम Obaidiah Kelly था और हर पार्सल पर निशानी के लिए वह अपने नाम के प्रारंभ के अक्षर OK दर्ज कर देता था और वहीं से इस शब्द ने प्रसिद्धि प्राप्त की.

मज़बूत दलील

रेड इंडियन
एक मज़बूत दलील ये भी है कि ओके किसी रेड इंडियन भाषा से आया है.
लेकिन इन कहानियों से कहीं अधिक सशक्त दलील यह मालूम होती है कि OK किसी रेड इंडियन भाषा का शब्द है.
ज्ञात रहे कि अमेरिका में आज तक रेड इंडियन भाषा के बहुत से शब्द प्रयोग किए जाते हैं. ख़ुद अमेरीकी राज्यों में से आधे राज्यों का नाम रेड इंडियन है. उदाहरणस्वरूप ओकलाहामा, डकोटा, उडाहो, विस्किनसन, उहायो, टेनेसी—यह सब रेड इंडियन नाम हैं.
कहा जाता है कि रेड इंडियन क़बीले चटकाव का सरदार एक दिन क़बीले के प्रतिनिधियों की बात सुन रहा था और हर बात पर ‘ओके, ओके’ कहता जाता था जिस का अर्थ था ‘हां ठीक है’.
किसी अमेरीकी पर्यटक ने इस घटना को देख लिया और फिर अपने साथियों में इस शब्द को प्रचलित कर दिया.
OK एक ऐसा शब्द है जिसे अमरीका वाले शुद्ध अमरीकी शब्द मानेते हैं क्योंकि यह शब्द अंग्रेज़ी भाषा के साथ इंगलिस्तान से वहां नहीं पहुंचा था बलकि यह अमेरीका की अपनी पैदावार है.
अगरचे पिछले तीस-चालीस वर्षों में इस शब्द को बाज़ारी बोलचाल से संजीदा लेखन में आने का रुतबा मिल चुका है और अब कोई शिक्षक उसके प्रयोग करने पर किसी क्षात्र को सज़ा नहीं देता है लेकिन कुछ शरारती क्षात्रों ने उस्तादों को गुस्सा दिलाने के लिए इस की बिगड़ी हुई शक्ल ‘ओकी’ और ‘ओकी.डोकी’ जैसे ऊटपटांग शब्द गढ़ लिए हैं.

Yankee शब्द कहाँ से आया?


यांकीज़
किसी भी अमरीकी के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जा सकता है.
ओके (OK) शब्द का मतलब बताते हुए बीच में एक और शब्द Yankee का वर्णन आ गया था और हम ने वादा किया था कि अगली बार इस शब्द की व्याख्या की जाएगी.
आज यह वादा पूरा करने का समय आ गया है.
ब्रिटेन और यूरोप में किसी भी अमरीकी नागरिक के लिए यांकी शब्द का प्रयोग हो सकता है, लेकिन यह कोइ घृणास्पद या अपमानजनक शब्द नहीं है (जैसा की पाकी (Paki) है, जिसका कुछ संकीर्ण विचारधारा वाले गोरों ने एशियाई बाशिंदों को धुतकारने और अपमानित करने के लिए आविष्कार किया था).
अमरीकियों के लिए यांकी (Yankee) शब्द किस प्रकार प्रयोग में आया, इस के बारे में कम से कम बीस कहानियां तो मशहूर हैं ही. मुझे जितनी कहानियां मिली हैं उन में से दो का वर्णन यहाँ उचित होगा.
अक्सर लोगों का विचार है कि यह शब्द पुरानी स्कॉटिश भाषा से आया है, जहाँ इस का मतलब हुआ करता था ‘तेज़-तर्रार’. आज भी अंग्रेज़ी में Yankee trader का शब्द मौजूद है.
लेकिन दूसरी कहानी के अनुसार यांकी शब्द हॉलैंड से आया है और इसकी पृष्टभूमि यह है कि हॉलैंड के सीधे-साधे देहातियों को जोकि पनीर बनाने का काम करते थे जर्मन लोग Jan kees (जांकीज़) कहा करते थे.
यांकी सैनिक
अमरीकी किसानों ने बोस्टन में ब्रिटेन के प्रशिक्षित सैनिकों को हराया था.
1600 ई. के बाद जब यह पनीर बनाने वाले देहाती स्थानांतरण कर के अमेरीकी तट्वर्ती क्षेत्रों में बस गए और न्यू इंग्लैंड के दक्षिण में इनकी खेती का कारोबार ख़ूब जम गया तो उन्होंने वही शब्द जो कभी उनको छेड़ने के लिए कहा गया था अथवा जानकीज़ को अब गर्व के साथ वे दूसरे उन प्रवासियों के लिए प्रयोग करने लगे जो न्यू इंग्लैंड में अपना फ़ार्म बनाने में लगे थे, लेकिन खेती-बाड़ी के काम में सक्षम नहीं थे.
क़ाबिज़ अंग्रेज़ फ़ौजियों को यह शब्द काफ़ी पसंद आया, और उन्होंने न्यू इंग्लैंड के सभी लोगों को Yankees (यांकीज़) कहना शुरू कर दिया.
अमरीकी गृह-युद्ध के दौरान इस शब्द के अर्थ में विस्तार पैदा हुआ और उत्तरी राज्यों के फ़ौजियों को दक्षिण वालों ने Yankees कह कर पुकारना शुरू कर दिया.
पहले और दूसरे विश्व-युद्ध में यूरोप में आने वाले सभी अमेरीकी सैनिक यांकी कहलाए.
बाद में इस शब्द का छोटा रूप Yank (यांक) भी प्रचलित हो गया.

गीत

विश्व-युद्ध के दौरान थके हारे मित्र-राष्ट्र के फ़ौजियों के लिए अमरीकी सहायता एक बहुत बड़ा सहारा था इसी लिए The Yanks are coming (यांक आ रहे हैं) का आशाप्रद गीत उन दिनों यूरोप में बड़ा लोकप्रिय हुआ था.
आज कल यह शब्द केवल अमरीकी फ़ौजियों के लिए ही नही है बल्कि हर अमेरीकी Yankee कहला सकता है.
यांकी स्टेडियम
न्यू यॉर्क में यांकी नाम का स्टेडियम भी है.
अब अगर यांकी की बात हो रही है तो लगे हाथों Yankee Doodle (यांकी डूडुल) को भी देख लिया जाए.
1775 का ज़माना था, क़ाबिज़ ब्रितानी फ़ौज हर प्रकार के फ़ौजी साज़ो-सामान से लैस थी और उसके सिपाही साफ़-सुथरी इस्त्री की हुई वर्दियाँ पहनते थे जबकि दूसरे उपनिवेशों के पास न तो वर्दियाँ थीं और न ही बाक़ायदा हथियार, बल्कि लाठियाँ, कुल्हाड़ियाँ और कुछ पुरानी बन्दूक़ें उनकी कुल जमा-पूंजी थी.
इसलिए उन फटे-हाल फ़ौजियों का मज़ाक़ उड़ाने के लिए बर्तानवी फ़ौज के एक डॉक्टर ने यांकी डूडुल के नाम से एक फ़ौजी गीत लिखा और जब क़ाबिज़ ब्रितानी फ़ौज ने बाग़ियों का एक ठिकाना तबाह करने के लिए बोस्टन से अपने फ़ौजी दस्ते रवाना किए तो उन्होंने Yankee Doodle की धुन पर मार्च करते हुए उपनिनेशों पर आक्रमण किया, लेकिन ख़ाली हाथ किसानों ने ऐसा मुंह-तोड़ जवाब दिया कि फ़ौज को दुम दबा कर भागना पड़ा.
इस पर निहत्थे किसानों ने अपनी पूरी शक्ति एकत्रित कर के बोस्टन तक ब्रितानी फ़ौज का पीछा किया और इस बार किसानों की विजयी टोलियों ने यांकी डूडुल (Yankee Doodle) की धुन पर मार्च करते हुए बोस्टन में प्रवेश किया.
यह सब कुछ तो 1775 में हुआ लेकिन पिछली दो शताब्दियों के दौरान यह फ़ौजी गीत “वीर तुम बढ़े चलो” जैसी हैसियत पा गया और अब इसे कोई भी गुट उत्साह और उमंग पैदा करने के लिए प्रयोग कर सकता है.