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07 December 2010

डॉ. भीमराव अंबेदकर का परिनिर्माण दिवस मनाया

ओढ़ां न्यूज़ :-
 
डॉ. अंबेदकर के चित्र पर पुष्प अर्पित करते दाताराम व अन्य  
डॉ. भीमराव अंबेदकर निर्वाण दिवस कार्यकम का दृश्य
    राजकीय प्राथमिक पाठशाला पन्नीवाला मोटा में डॉ. भीमराव अंबेदकर युवा क्लब एवं ग्राम पंचायत के सहयोग से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेदकर का 54 वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया। एएसआई बाबू लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में गांव के सरपंच प्रतिनिधि दाता राम बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। इस अवसर पर डॉ. साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्यातिथि दाता राम ने कहा कि डॉ. साहेब कठिन परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण करते हुए अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़े और उन्होंने समाज के उत्थान के लिए ताउम्र संघर्ष किया। डॉ. साहेब के जीवन में तीन बातों का समावेश मिलता है, शिक्षित बनो, संघर्ष करो व संगठित रहो। इस अवसर पर मुख्याध्यापक रामस्वरूप सेठी, हरपाल सिंह तगड़, महेंद्र, रमेश, महिला विंग ओढ़ां कांग्रेस ब्लॉक प्रधान शिमला रानी, डॉ. भीमराव अंबेदकर युवा क्लब के सभी पदाधिकारी व सदस्य, सुनीता देवी, आंगनबाड़ी वर्कर सरना देवी, श्रीराम, विनोद सिंहमार, रोहताश, पंच हेतराम, दीपक सोढ़ी और मोहर सिंह सोढ़ी सहित काफी संख्या में गांव के गणमान्य लोग उपस्थित थे |

गेहूं की पछेती बिजाई को लेकर असमंजस में किसान

 ओढ़ां न्यूज़ :-
    गेहूं की बिजाई पछेती होने के कारण किसानों को चिंता लगी हुई है कि वे गेहूं की किस किस्म की बिजाई करें। किसानों साहबराम नंबरदार, टेकचंद खीचड़, प्रदीप व राकेश जाखड़, बलदेव जाखड़, भूप टाडा, जीताराम जाखड़, रामकुमार व महेंद्र डुडी आदि ने बताया कि नरमा की बिजाई पछेती होने के कारण अब उन्हें गेहूं की बिजाई भी पछेती ही करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि आमतौर पर ज्यादातर गेहूं की बिजाई नवंबर माह में ही हो चुकी है और अब दिसंबर माह में उन्हें पछेती किस्मों के बीज को लेकर चिंता लगी हुई है और वे बीजी जाने वाली गेहूं की किस्मों को लेकर असमंजस में है।
    इस विषय में एडीओ सुरजीत सिंह से बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि इस समय पछेती बिजाई के लिए किसान गेहूं की 3765, 291, 373, 509 और 47 आदि किस्मों का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि इसके साथ प्रत्येक एकड़ में 20 किलो पोटाश, 10 किलो जिंक और एक थैला यूरिया डालना लाभदायक रहेगा। फसल को दीमक से बचाने के लिए उन्होंने कहा कि किसान एक किवंटल बीज के पीछे पानी में घोलकर 250 ग्राम क्लोरो तथा प्रति एकड़ 100 ग्राम रेक्सील का प्रयोग करें। इससे पैदावार अच्छी होगी।

ग्रामीणों ने की हाइवे पर रास्ता छोडऩे की मांग

 ओढां न्यूज़ :-

    ओढ़ां में राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 के किनारे बसे गांववासियों ने पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता को एक पत्र भेजकर फोरलेन किए जा रहे राजमार्ग पर रास्ता छोडने की मांग की है।
    गांववासियों किशन कुमार, सतबीर, कुलदीप, संदीप, कृपा राम, रामस्वरूप, लीलू राम, बलवंत, विनोद, रामचंद्र, जगदीश, जोगेंद्र, विकास, भूषण, हरविंद्र, जसविंद्र, कुलविंद्र, लछमी, संतोष और सोनू आदि ने पत्र में लिखा है कि ओढ़ां में हाइवे को चौड़ा करके उसके मध्य डिवाडर बनाया जा रहा है उसमें कालांवाली तिराहे से लेकर गुरुद्वारा के सामने मंडी रोड तक एक ही रास्ता दिया गया है जबकि इसके मध्य विश्रामगृह, आटो मार्केट व किसानों के 20-25 के लगभग मकान आते हैं। इसके कारण किसानों को अपनी ऊंटगाड़ी, पशु व ट्रैक्टर और स्कूली बच्चों को विपरीत साइड से लाना पड़ता है और व्यस्त मार्ग होने के कारण दुर्घटना का भय बना रहता है। इसके साथ ही घरों के आगे जो जल निकासी नाला है वो काफी गहरा बनाया गया है उसे भी ढका नहीं गया है जिसके कारण उसमें अक्सर पशु आदि गिर जाते हैं। उन्होंने मांग की है कि जल निकासी नाले को ढका जाए और हाइवे पर इस बीच दो रास्ते एक विश्रामगृह के सामने दूसरा आटो मार्केट के सामने छोड़ा जाए ताकि किसी दुर्घटना का भय न रहे।
    इस विषय में राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 हिसार के कार्यकारी अभियंताऐके गोयल से बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि लोगों की दिक्कत को देखते हुए थाना व विश्रामगृह के सामने एक रास्ता बना दिया जाएगा ताकि सामने वाले घरों को परेशानी न हो।

06 December 2010

तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा—रमेश गोयल

 ओढ़ां न्यूज़ :-

    जल विद्युत बचत अभियान को एक मिशन के रूप में लेते हुए शिक्षण संस्थानों में प्रार्थना सभाओं में जाकर अब तक 70000 से भी ज्यादा विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से बिजली व पानी को बचाने का संदेश दे चुके भारत विकास परिषद केंद्रीय टीम के क्षेत्रीय संयोजक रमेश गोयल ओढ़ां पहुंचे और उन्होंने यहां स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा जल व विद्युत बचाने के उपाय सुझाए।
    उन्होंने कहा कि अपना वंश चलाने के लिए इंसान क्या नहीं करता, उनके लिए जो धन संपत्ति जोडऩे में व्यक्ति पूरी जिंदगी लगा रहता है लेकिन नहीं सोचता कि धन संपत्ति ज्यादा कीमती जल भी उनके लिए बचाया जाए जो किसी फैक्टरी में नहीं बनता जो बल्कि प्रकृति की देन है और सीमित मात्रा में उपलब्ध है। जल की बचत करने की बजाय उसे बर्बाद करते समय ये नहीं सोचते कि हमारी आने वाली पीढ़ी को घोर संकट में धकेल रहे हैं। आज विश्व के एक अरब से ज्यादा लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिलता जबकि प्रत्येक व्यक्ति को निर्जलीकरण से बचने के लिए प्रतिदिन कम से कम 6-7 गिलास पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत, चीन व अमेरिका जैसे देशों में अत्यधिक जलदोहन से भूजल स्तर में तेजी से आई गिरावट संकेत देती है कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। सन 2031 तक हमें आज के मुकाबले 4 गुणा अधिक पानी की आवश्यकता होगी। पानी के लिए लड़ाई गली मोहल्लों तक ही नहीं बल्कि हरियाणा व पंजाब, कर्नाटक व तामिलनाडु और हरियाणा व दिल्ली के मध्य तनाव जगजाहिर है। पिछले 200 वर्षों के मुकाबले आने वाले 20 वर्ष में हमें जल प्रबंधन की आवश्यकता कहीं अधिक होगी। अर्थात यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में हमारे नाती पोते बिन पानी सब सून के अनुसार जल के बिना तड़पते नजर आएंगे। हरियाणा में नजर दौड़ाएं तो प्रांत के कुल 119 खंडों में से 55 डार्क जोन में हैं और 43 की स्थिति चिंताजनक है।
    उन्होंने कहा कि जल को लेकर वर्तमान स्थिति इतनी विस्तृत है कि जाने कितना समय लगे अत: बात करते हैं पानी की बचत करने की। पानी की बचत हेतु कभी नल को खुला न छोड़े और सार्वजनिक नल खुला देखें तो बंद करदें, शेव, पेस्ट करते या हाथ मुंह धोते समय नल बंद करके मग का प्रयोग करें और पुश बटन वाली टोंटी लगवाएं। नहाते समय छोटे आकार की बाल्टी का प्रयोग करें और दिन में एक बार ही नहाएं। कपड़े मशीन की बजाय बाल्टी में खंगाले, पाइप से जल रिसाव तुरंत बंद करें, पानी की टंकी या कूलर में गुब्बारा लगवाएं ताकि भरने पर पता चल जाए, बर्तन साफ किए, टब के पानी व कपड़े खंगाले पानी को पौधों आदि में डालें। उन्होंने कहा कि मिट्टी वाले स्थान को साफ करने के बाद पोचा लगाएं, फर्श व वाहन धोने का काम पाइप की बजाय पोचा लगाकर करें। अनावश्यक छिड़काव न करें और पेयजल से पशु न नहलाएं, पौधों को भी पाइप की बजाय आवश्यकतानुसार बाल्टी से पानी दें और संभव हो तो फब्बारा या ड्रिप सिस्टम अपनाएं तथा वर्षा जल संग्रहण तकनीक अपनाएं। गांव के तालाब में पानी एकत्र करें। उन्होंने कहा कि शौचालय के बाहर हाथ धोने के बाद खोली गई टोंटी हम हाथ धोने बाद बंद करते हैं, हाथ गीला करने, साबून लगाने और हाथ मलते समय पानी व्यर्थ बहता है अत: हाथ गीला करके टोंटी बंद करदें और हाथ धोते समय ही खोलें। इसी प्रकार दंतमंजन करते समय ब्रश गीला करने के लिए खोली गई टोंटी कुल्ला करने के बाद ही बंद की जाती है, स्नानगृह में बाल्टी में नल छोड़कर नहाने से एक दो बाल्टी की बजाय 5-7 बाल्टी पानी खर्च कर दिया जाता है। इसी प्रकार बर्तन साफ करते समय तथा अन्य कार्य करते समय हम जरा सा ध्यान रखें तो प्रतिदिन काफी पानी बचा सकते हैं और हमारी आने वाली नस्लों को बचा सकते हैं।
                               स्वयं करें, परिवार व नौकर को समझाएं, समाज को जगाए तथा देश बचाएं।

योग आश्रम में मासिक सत्संग सम्पन्न

ओढां न्यूज़ :-

    खंड ओढ़ां के गांव रोहिडांवाली में स्थित ब्रह्मविद्या विहंगम योग आश्रम में रविवार को आयोजित मासिक सत्संग में उपदेष्टा हरलाल सिंह ने ब्रह्मविद्या के महत्व और उसकी आवश्यकता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मविद्या को हम पराविद्या, आध्यात्मविद्या व मधुविद्या भी कहते हैं। ब्रह्मविद्या द्वारा आध्यात्म क्षेत्र के समस्त तत्वों का प्रत्यक्ष योगभ्यास विशेष भूमि पर साधना के द्वारा केवल सदगुरु द्वारा प्राप्त होता है न कि मन, बुद्धि व इंद्रीयों द्वारा। प्राकृतिक भूमियों में साधन अभ्यास के द्वारा अथवा प्राकृतिक साधनों द्वारा केवल कुछ फल प्राप्त होते हैं न कि आत्मप्रत्यक्ष होती है। ब्रह्मविद्या एक तत्व है जिसको जान लेने से सब जाना जाता है। ब्रह्मविद्या सदगुरु द्वारा जानी जा सकती है इधर उधर स्वयं ग्रंथ पढ़कर नहीं। कई लोग कहते हैं कि ईश्वर प्राप्ति के अनेकों मार्ग है वे अबोध बालक हैं और बड़ी भूल में हैं। ब्रह्मप्राप्ति का मार्ग एक ही है जो सुष्मन द्वार है इस भेद कला को सदगुरु उपदेश करते हैं। यह गोपनीय महापथ केवल गुरु प्रसाद से ही प्राप्त होता है अन्य उपाय से नहीं। आध्यात्मविद्या ब्रह्मविद्या के प्रकाश में सब काम वासनाएं जलकर आत्मा विशुद्ध हो जाती है और शुद्ध स्वरूप का साक्षात्कार करके जीवन मुक्ति प्राप्त होती है। इस अवसर पर साधक राजाराम गोदारा सहित अनेक साधक उपस्थित थे।