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05 June 2017

पर्यावरण दिवस पर किया स्वच्छता अभियान का शुभारंभ
ओढ़ां
पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोमवार को ग्राम पंचायत ओढ़ां द्वारा स्वच्छता अभियान का शुभारंभ स्थानीय खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय से किया गया।
इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण बेरवाल ने बताया कि स्वच्छता अभियान के दौरान के सभी सार्वजनिक स्थलों सहित पूरे गांव के गली मोहल्लों में सफाई अभियान चलाया जाएगा ताकि पूरा गांव साफ सुथरा रहे। इस मौके पर कृष्ण बेरवाल सहित पंचायत सचिव जगबीर सिंह, जोगेंद्र सिंह, जगसीर सिंह, सतासिंह और बूटा सिंह सहित सभी पंचायत सदस्य व अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
पौधारोपण कर मनाया पर्यावरण दिवस
ओढ़ां
गोल्डन स्टार युवा क्लब पन्नीवाला मोटा द्वारा पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण किया गया। जिस के तहत गांव के बस स्टैंड , सरस्वती मिडल स्कूल व अन्य कई जगह पौधारोपण किया गया।
इस दौरान क्लब अध्य्क्ष  सुरेश लुटसरा ने कहा कि हमे अपने जीवन मे कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उनकी देखभाल करनी चाहिए। महासचिव सुरेंदर ढाका ने क्लब सद्श्यो को शपथ दिलाई की वो अपने जन्मदिवस पर एक पौधा जरूर लगाएं।  इस दौरान गांव से लालाराम सोढ़ी , धर्मपाल, कार्तिक बेनीवाल, रविकुमार, नरेंद्र कुमार, हरिओम, शिव ढाका, सुधीर कस्वां, रामनिवास, अनिल, पवन, रणजीत कस्वां, इंद्रपाल, सुभाष, सुरेंदर और गांव से गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

एक स्वस्थ व्यक्ति ही राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है : पवन देमीवाल

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जारी है सात दिवसीय समर कैंप
ओढ़ां
खंड ओढ़ां के गांव नुहियांवाली के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे सात दिवसीय समर कैंप के पांचवें दिन का शुभारंभ सरस्वती वंदना से शुरू हुआ।

नृत्य प्रशिक्षक सुशील सारस्वत ने संगीत पर भांगड़ा के आगे के स्टेप करवाए जिन्हें विद्यार्थियों ने बड़ी रुचि व आनंद के साथ सीखा। हारमोनियम प्रशिक्षक रणजीत सिंह ने विद्यार्थियों को हारमोनियम पर सुर व ताल में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम व राष्ट्रीय गान जन गण मन करवाया गया। इस दौरान आज विश्व पर्यावरण दिवस भी बनाया गया। हिन्दी व्याख्याता पवन देमीवाल ने विद्यार्थियों को बताया कि प्रतिवर्ष 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा एवं सरंक्षण हेतु पूरे विश्व में बनाया जाता है। इसे ईको दिवस के नाम से भी जाना जाता है। 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इसको बनाने का उद्देश्य पर्यावरण मुद्दों के बारे में आम लोगों को जागरुक करना, सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक सुखी भविष्य का आनंद लेने के लिए लोगों को अपने आसपास के माहौल को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण दिन प्रतिदिन पर्यावरण की स्थिति गिरती जा रही है। इसकी सुरक्षा के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाना तथा साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। देमीवाल ने विद्यार्थियों को स्वच्छता के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता का विशेष महत्व है। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अत: हर व्यक्ति को जीवन में स्वच्छता अपनानी चाहिए तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। हमें खुले में शौच नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे अनेक बीमारियाँ फैलती है तथा वातावरण अशुद्ध होता है। देमीवाल ने पेड़ काटने वाले काट गए कविता के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया। इस मौके पर पर्यावरण से संबंधित पेंटिग प्रतियोगिता करवाई गई जिसमें प्रथम सुरेन्द्र, द्वितीय अरबिन्द व तृतीय स्थान सुमन ने प्राप्त किया। इस मौके पर निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में बताया कि हिंदू धर्म में सभी एकादशियों में इसका विशेष महत्तव है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है, इस अवसर पर दान पुण्य का विशेष महत्व है। गर्मी से राहत देने के लिए छाता, पंखें, शीतल पेय पदार्थ इत्यादि दान का महत्व है। कैंप के विद्यार्थियों को विद्यालय की ओर से आईसक्रीम खिलाई गई। इस मौके पर संगीत प्रशिक्षक रणजीत सिंह,सतीश कुमार, सुशील सारस्वत, पवन देमीवाल, रोहताश, हरपाल सिंह, विनोद सोनी, कीर्तिबाला आदि स्टॉफ सदस्य मौजूद थे।

धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं ने लगाई ठंडे मीठे पानी की छबीलें

ओढ़ां
निर्जला एकादशी के अवसर पर सालासर यात्री संघ ओढ़ां द्वारा कस्बे के मध्य स्थित ग्रीन मार्किट और रामलीला मैदान में ठंडे मीठे पानी की छबीलें लगाई गई।
इस अवसर पर संघ के प्रधान मास्टर हरीराम गोयल के नेतृत्व में संघ सदस्यों व कस्बे के युवाओं द्वारा ग्रामीण महिला, पुरूष, बच्चों व राहगीरों को शीतल जल पिलाया गया। संघ प्रधान मास्टर हरीराम गोयल ने बताया कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है इस व्रत में पानी का पीना वर्जित है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर इस दिन प्यासे लोगों को शीतल जल पिलाने से भी पुण्य मिलता है। इस मौके पर प्रधान हरीराम गोयल के अलावा उपाध्यक्ष सुरेंद्र बांसल, सतीश गर्ग, राजेश गोयल, रामलाल गर्ग, अंकुश शर्मा, सुखजीवन सिंगला, सुधीर कुमार, जगरूप सिंह नूपी, राकेश कुमार, राधेश्याम, रतनलाल और अमित सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।
वहीं दूसरी ओर श्री हनुमत सेवा समिति ओढ़ां द्वारा श्री हनुमान मंदिर में ठंडे मीठे पानी की छबील लगाकर राहगीरों, वाहन चालकों व यात्रियों को शीतल जल पिलाया गया। इसी प्रकार गांव पन्नीवाला मोटा के महाकाली मंदिर में गोल्डन स्टार युवा क्लब द्वारा भी ठंडे पानी की छबील लगाकर लोगों को ठंडा जल पिलाया गया। पन्नीवाला मोटा में ही ग्राम सुधार युवा मंडल तथा ओलिंपिक स्पोर्ट्स एंड फुटबॉल युवा क्लब के सदस्यों द्वारा गांव के बस स्टैंड पर निर्जला एकादशी के उपलक्ष्य में राहगीरों तथा ग्रामवासियों के लिए ठंडे पानी की छबील लगाई गई। क्लब प्रधान भजनलाल तथा संदीप कुमार ने कहा कि इस गर्मी के समय में प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना ही सबसे बड़ा धर्म हैं।  आज की तरह हमेशा ही हमें प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाकर मानव धर्म निभाते रहना चाहिए। इस अवसर पर क्लब प्रधान संदीप बादल, भजनलाल, प्रवीण कस्वां, सुभाष कस्वां, सुरेंद्र कस्वां, कृष्ण कस्वां, सुभाष सहारण, मोहन लाल, पवन सहारण, रणजीत कस्वां, इंद्रपाल और राजाराम सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

डेरा अमरनाथ योगी आश्रम के गद्दीनशीन संत रविनाथ ने रखी नींव

ओढ़ां के प्राचीन मंदिर श्री ठाकुर द्वारा पुन: निर्माण शुरू
ओढ़ां
ओढ़ां कस्बे के मध्य स्थित प्राचीन श्री ठाकुर द्वारा मंदिर के पुन: निर्माण का कार्य समस्त कस्बा वासियों के सहयोग से सोमवार को शुरू किया गया। इस अवसर पर मंदिर की नींव पंडित कृष्णलाल द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण के मध्य राजस्थान के नोहर में स्थित डेरा अमरनाथ योगी आश्रम के गद्दीनशीन संत रविनाथ द्वारा रखी गई।
उल्लेखनीय है कि ओढ़ां के सबसे पुराने मंदिर श्री ठाकुर द्वारा का निर्माण लगभग एक शताब्दी पूर्व किया गया था। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि उस समय इस क्षेत्र में पानी का अभाव इतना ज्यादा था कि महिलाओं को एक घड़ा पानी लाने हेतु कई किलोमीटर तक चलना पड़ता था लेकिन मंदिर निर्माण के प्रति गांववासियों में इतनी श्रद्धा थी कि गांव की महिलाओं ने 5-5 घड़े पानी की सेवा की थी। उस समय इस मंदिर में ठाकुर जी की लकड़ी से बनी मूर्ति की पूजा समस्त गांववासियों द्वारा की जाती थी और पंडित बचनाराम द्वारा पूजा अर्चना की जाती थी। समय बीतने के साथ ओढ़ां में अन्य अनेक मंदिरों का निर्माण हुआ और उचित रखरखाव के अभाव में यह प्राचीन मंदिर खंडहर होने के बाद ढह गया था। अब समस्त गांववासियों के सहयोग से इस मंदिर का पुन: निर्माण किया जा रहा है जिसके तहत यहां दो मंजिला भव्य मंदिर बनाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व सरपंच भूप मल्हान, जगदीश मायला, हनुमत सेवा समिति प्रधान जोतराम शर्मा, सालासर यात्री संघ प्रधान हरीराम गोयल, श्री दुर्गा भजन मंडल के प्रधान जसपाल तगड़, राजू सोनी, शेर सिंह, मोहन लाल, काफी संख्या में ग्रामीण महिला पुरूष मौजूद थे।