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04 April 2017

प्रवेश उत्सव के तहत विद्यार्थियों ने निकाली जागरूकता रैली

ओढ़ां
राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओढ़ां के विद्यार्थियों द्वारा प्रवेश उत्सव सत्र 2017-18 के अंतर्गत गांव में जागरूकता रैली निकाली गई।
रैली में शामिल विद्यार्थियों ने ऊंची आवाज में नारे लगाकर आम लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हुए आमजन से अपील की कि वे अपने बच्चों को राजकीय विद्यालयों में दाखिला दिलवाएं। विद्यार्थियों ने लोगों का जागरूक करते हुए सरकारी विद्यालयों में सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं से अवगत करवाया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओढ़ां से निकली यह जागरूकता रैली कालांवाली रोड, नवोदय रोड, हरिजन बस्ती, पुरानी अनाज मंडी, थाना रोड, जीटी रोड सहित गांव की अलेक गलियों व मोहल्लों से होते हुए वापिस विद्यालय पहुंची। इस रैली में प्रिंसिपल सुभाष कुमार फुटेला, मुख्य शिक्षक रिछपाल सिंह गोदारा, डीपीई बलविंद्र सिंह, अजायब सिंह जलालआना, जगदीप सिंह, श्रीओम शर्मा, सतीश शर्मा, राम सिंह कुलरिया और रमेशचंद्र सहित अन्य स्टाफ सदस्य तथा सैकड़ों विद्यार्थी शामिल थे।

रक्तदान शिविर में 66 लोगों ने दिया रक्तदान

ओढ़ां
गांव मलिकपुरा के हाई स्कूल में ग्राम पंचायत व शिव शक्ति ब्लड बैंक द्वारा समस्त गांववासियों के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं सहित कुल 66 लोगों ने रक्तदान किया।
इस अवसर पर सरपंच गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम अपने जन्मदिवस व सालगिरह जैसे विशेष अवसरों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करें। इस अवसर पर सरपंच गुरमीत सिंह के अतिरिक्त ग्राम पंचायत सदस्यों पूर्व सरपंच इकबाल सिंह, मैनेजर रणजीत सिंह व हरविंद्र सिंह, रूपनीत सिंह पटवारी और अध्यापक कुलविंद्र सिंह ने रक्तदान विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान करके हम किसी को नई जिंदगी दे सकते हैं। इस मौके पर शिविर के आयोजन में स्कूल स्टाफ, ग्राम पंचायत सदस्य और अनेक युवाओं सहित अन्य अनेक गांववासियों ने सराहनीय योगदान दिया।

श्रीरामकथा के पात्रों से सीख लेकर सार्थक हो सकता है जीवन : स्वरूपदास

नुहियांवाली की श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला में श्रीरामकथा एवं दुर्लभ सत्संग

ओढ़ां
खंड के गांव नुहियांवाली में समस्त गांववासियों के सहयोग से आयोजित श्रीरामकथा भक्तिमय माहौल में सम्पन्न हो गई लेकिन गांववासियों के विशेष आग्रह पर स्वामी विजयानंद गिरी ने कहा कि दुर्लभ सत्संग का समापन अगले दिन होगा।
श्रीरामकथा के समापन पर हवन यज्ञ और भंडारे में नुहियांवाली और आसपास के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सरपंच बाबूराम गैदर ने सबके सामने मदिरा सेवन को हमेशा के लिए त्याग देने का प्रण लिया तो अन्य अनेक गांववासियों ने भी व्यस्नों को त्यागने की शपथ लेते हुए प्रतिदिन सुबह सबेरे गोशाला में गोसेवा करने का संकल्प लिया।
श्रीरामकथा के समापन पर कथावाचक स्वामी स्वरूप दास ने कहा कि भगवान श्रीराम ही नहीं बल्कि रामकथा के सभी पात्र अपने धर्म का पालन हुए मानवता के कल्याणार्थ आदर्श प्रस्तुत करते हैं। श्रीराम ऐसे आदर्श पुत्र हंै जिनके लिए पिता की आज्ञा सर्वोपरि है। पति के रूप में उन्होंने सदैव एकपत्नीव्रत का पालन किया तथा राजा के रूप में प्रजाहित को सर्वोपरि समझा। वे अत्यन्त तेजस्वी, विद्वान, धैर्यशील, पराक्रमी, दुष्टों का दमन करने वाले, युद्ध एवं नीति कुशल, धर्मात्मा, मर्यादा पुरुषोत्तम, प्रजा वत्सल, शरणागत को शरण देने वाले, सर्वशास्त्रों के ज्ञाता एवं प्रतिभा सम्पन्न हैं। वहीं दूसरी ओर महान पतिव्रता सीताजी वैभव और ऐश्ववर्य को त्याग पति संग वन को गई तथा भातृप्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर लक्ष्मण भी साथ गए। भरत ने स्वयं की बजाय बड़े भाई की पादुका सिहांसन पर प्रतिष्ठित कर सेवक के रूप में राज किया। कौशल्या ने कैकई पुत्र भरत पर राम समान स्नेह लुटाते हुए आदर्श माता की भूमिका निभाई और हनुमानजी आदर्श भक्त हैं तथा रावण का चरित्र बताता है कि अहंकार पतन का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि उक्त पात्रों से सीख लेकर नि:संदेह मानव जीवन सार्थक हो सकता है।
इस अवसर पर गोशाला प्रबंधक समिति के अध्यक्ष बलराम सहारण, महेंद्र नीमिवाल, रामेश्वर कूकना, महेंद्र गैदर, ओम सुमरा, बद्रीप्रसाद गैदर, उदयसिंह राजपूत, हंसराज निमीवाल, भागाराम नेहरा, मांगेराम कूकना, अमर सिंह, कृष्ण कूकना, असीर गैदर और दुलीचंद नेहरा आदि ने श्रीरामकथा के समापन पर हजारों श्रद्धालुओं तथा दोनों स्वामी जी को बधाई व धन्यवाद देते हुए श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर कथास्थल करतल ध्वनि से गूंज उठा। इस मौके पर श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला के सेवादारों सहित अनगिनत महिला पुरूष श्रद्धालु मौजूद थे।

03 April 2017

क्लब सदस्यों ने बच्चों को पिलाई पोलियोरोधी दवा

ओढ़ां
गांव पन्नीवाला मोटा और नुहियांवाली में ग्राम सुधार युवा मंडल एवं ओलंपिक फुटबॉल एवं स्पोर्ट्स युवा क्लब तथा शिवशक्ति युवा क्लब नुहियांवाली के सदस्यों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को पालियो की दवा पिलाने में सराहनीय योगदान दिया।
क्लय सदस्यों ने वार्ड नंबर 8 की महिला पंच कांता देवी के नेतृत्व में चिकित्सकों, नर्सों व आशा वर्करस के साथ सहयोग करते हुए शून्य से पांच वर्ष तक आयु के बच्चों को पोलियोरोधी दवा पिलाई। क्लब संरक्षक प्रदीप कुमार, प्रधान भजनलाल तथा स्पोर्ट्स कल्ब प्रधान संदीप बादल ने उपस्थित ग्रामीणों को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए पोलियोरोधी दवा का महत्व बताते हुए कहा कि अपने 5 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को दवा पिलाने के साथ साथ अन्य लोगों को भी बताएं तथा हर बच्चे को पोलियोरोधी दवा पिलाने के अभियान में सहयोग दें। इस मौके पर क्लब उपप्रधान प्रवीन कस्वां, समाजसेवी दीपक महेश्वरी, सुरेन्द्र डूडी, रमन कस्वां, आंगनबाड़ी वर्कर सरना देवी, संतोष देवी, सुमित्रा देवी, कैलाश रानी, राज रानी, धापा देवी, नीलम देवी व सलमा सहित अनेक बच्चे व उनके अभिभावक मौजूद थे।

कन्या के समान कोई रत्न नहीं और कन्यादान का कोई विकल्प नहीं होता : स्वामी विजयानंद गिरी

नुहियांवाली की श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला में श्रीरामकथा एवं दुर्लभ सत्संग
ओढ़ां
खंड के गांव नुहियांवाली में श्रीरामकथा एवं दुर्लभ सत्संग के दौरान स्वामी विजयानंद गिरी ने कहा कि अपने युवा पुत्र के आकस्मिक निधन पर एक भी आंसू न बहाने वाला पिता अपनी पुत्री की विदाई पर फूट फूटकर रोता है क्योंकि बेटियां ऐसी ही होती हैं।
पिता को पुत्री तथा पुत्री को पिता से विशेष स्नेह होता है और वे एक दूसरे की पीड़ा को देख नहीं सकते। पुत्री हेतु वर की खोज में गया पिता जब निराश लौटकर पत्नी को बताता है तो उनका वार्तालाप सुन पुत्री कहती है कि पिताश्री आप किसी के पांव पर अपनी पगड़ी रखें ये मुझे मंजूर नहीं अत: मेरी चिंता छोड़ दीजिए जो भाग्य में होगा स्वयं मिल जाएगा। पुत्रों में इस प्रकार की सोच का अक्सर अभाव रहता है इसीलिए विलक्षण होती हैं बेटियां। भाग्यवान होते हैं वे जिनके घर में दो कुलों का उद्धार करने वाली बेटी जन्म लेती है। कन्यादान का कोई विकल्प नहीं होता और कन्या के समान कोई रत्न नहीं होता लेकिन अति दुर्भाग्यपूण है ये कि जिस देश में आदिशक्ति की पूजा होती है उस देश में कुछ बुद्धिहीन लोग कन्या को कोख में कत्ल करने जैसा अक्षम्य अपराध करने में लगे हैं जिसका कोई प्रायश्चित नहीं। उन्होंने कहा कि घर में बेटी पैदा होना शोक नहीं हर्ष का विषय है जिस पर खुशियां मनाई जानी चाहिए। जिन घरों में कन्याएं निवास करती हैं वे हमेशा धन धान्य से भरपूर रहते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि हिंदू और हिंदूस्तान के विकास में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और गीता प्रैस का योगदान अतुलनीय है। ये दो संस्थाएं न होती तो ना जाने हिंदू और हिंदूस्तान आज किस स्थिति में होते। गीता प्रैस के संस्थापक महान गीता मर्मज्ञ जयदयाल गोयंदका का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यूं ही एक बार सत्संग के दौरान जब उन्होंने कहा कि किसी से वैर न रखो तो एक भक्त ने अपने पास बैठे व्यक्ति की ओर इशारा कर कहा कि मैंने इसके साथ चला रहा वैर त्याग दिया तो दूसरा बोला मैं नहीं त्याग सकता, उसे बहुत समझाया पर वो नहीं माना और बोला कि मैं तो इससे अपना वैरभाव अपने साथ ही लेकर जाऊंगा। उस समय वहां मौजूद जयदयाल गोयंदका जी ने एक ही वाक्य बोला कि भाई यदि साथ ही ले जाना है तो कुछ अच्छा लेकर जाओ वैर का क्या ले जाना। उनके इस वाक्य ने उसका हृदय परिवर्तन कर दिया। उन दोनों में वैर समाप्त होने पर वे दोनों भरी सभा में एक दूसरे के गले लगते हुए इतना फूट फूटकर रोए कि सभी उपस्थितजनों की आंखें नम हो गई। स्वामी जी ने कहा कि संसार में किसी से वैर मत रखो ऐसा करने से जीव के पुण्यकर्म क्षीण हो जाते हैं।
स्वामी जी के आग्रह पर आज कथास्थल के बाहर विशेष रूप में केश कर्तन की व्यवस्था की गई थी जहां अधिकतर श्रद्धालुओं और बच्चों को शिखा धारण करवाई गई और हिंदू धर्म के अनुसार अन्य क्रियाक्लापों को करने बारे जानकारी दी गई। इस अवसर पर ज्यादातर श्रद्धालुओं ने धोती, कुर्ता और पगड़ी धारण की थी तथा विवाहित महिलाएं अपने सुहाग चिन्हों से युक्त होकर एवं बहन बेटियां भी संस्कारित भारतीय परिधान में नजर आई जिसने श्रद्धालुओं को नुहियांवाली में मिनी भारत के दर्शन करवा दिए। इस मौके पर श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला के सेवादारों सहित अनगिनत महिला पुरूष श्रद्धालु मौजूद थे।