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05 April 2017

क्लब सदस्यों ने बच्चों को पिलाई दो बूंद जिदगी की

ओढ़ां
शिव शक्ति क्लब नुहियांवाली ने तीन दिवसीय प्लस पोलियो अभियान के अंतर्गत महत्वपूर्ण योगदान दिया। तीन दिनों में क्लब सदस्यों ने नुहियांवाली के उपस्वास्थ्य केंद्र के बूथ पर और घर घर तथा ढाणियों में जाकर शून्य से पांच वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों को पालियो रोधक दवा पिलाई।
क्लब प्रधान अनिल परिहार ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि हमें अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए इस अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने हेतु समय समय पर जिंदगी की दो बूंदें अवश्य पिलानी हैं। उन्होंने बताया कि पोलियो एक लाईलाज बीमारी है जिसके कारण बच्चा कमजोर और अपंग होकर समाज की घृणा का शिकार हो जाता है अत: हमें किसी भी प्रकार की कोई चूक नहीं करनी है। इस दौरान तीन दिनों में पांच वर्ष तक के कुल 406 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई गई। इस मौके पर अनिल परिहार, सुमित परिहार, विनोद कुमार, एएनएम आत्म, ममता रानी, आशा वर्कर सुमित्रा देवी सहित अन्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं गांव पन्नीवाला मोटा में ग्राम सुधार युवा मंडल तथा ओलंपिक फुटबॉल एवं स्पोर्ट्स युवा क्लब के सदस्यों ने भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वार्ड नंबर 8 की महिला पंच कांता देवी के नेतृत्व में चिकित्सकों, नर्सों, आशा वर्करस, प्रदीप कुमार, भजनलाल, संदीप बादल, प्रवीन कस्वां, दीपक महेश्वरी, सुरेन्द्र डूडी, रमन कस्वां, आंगनबाड़ी वर्कर सरना देवी, संतोष देवी, सुमित्रा देवी, कैलाश रानी, राज रानी, धापा देवी, नीलम देवी व सलमा आदि ने बच्चों को पालियो की दवा पिलाने में सराहनीय योगदान दिया।

जय और पराजय सांसारिक मार्ग में होती हैं परमार्थ के मार्ग में तो जय ही जय : विजयानंद गिरी

नुहियांवाली की श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला में दुर्लभ सत्संग सम्पन्न

ओढ़ां
खंड के गांव नुहियांवाली की गोशाला में आयोजित दुर्लभ सत्संग के समापन पर प्रवचन फरमाते हुए स्वामी विजयानंद गिरी ने जीव के अंतिम पुरूषार्थ शरणागति का विवेचन करते हुए कहा कि भगवान अपने सहज कृपालु स्वभाव के चलते शरण में आए भक्त का घोर पाप भी क्षमा कर देते हैं।
शरणागति कर्म नहीं भाव है जो स्वतंत्रतापूर्वक किया जा सकता है लेकिन कर्म संगठन के माध्यम से और कर्मफल भविष्य में आदि मान्यताएं शरीर को लेकर हैं। मैं केवल प्रभु का और मेरे केवल प्रभु ये स्वीकृति ही शरणागति है। भगवान ने जीव को सबसे श्रेष्ठ मानव जीवन प्रदान कर स्वतंत्र बना दिया लेकिन जीव अपने रचयिता से विमुख और संसार के सम्मुख हो दुखों से ग्रस्त हो गया। जो प्रभु के सम्मुख रहता है या उसकी शरण में हो जाता है उसकी चिंता वे स्वयं करते हैं तथा जीव निर्भय, निश्चिंत, निसंग और नि:संकोच हो जाता है। जैसे शादी के बाद अजनवी पति के साथ जा रही बेटी क्या मां से कहती कि ना जाने पति रोटी दे या नहीं इसलिए दो किलो आटा साथ बांध दो? जब बेटी इतनी निश्चिंत है तो जीव के मन में अपने रचयिता के प्रति संशय क्यों?
स्वामी जी ने कहा कि जय और पराजय सांसारिक मार्ग में आती हैं परमार्थ के मार्ग में तो जय ही जय होती है क्योंकि प्रभु परमार्थी के वश में हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु से कुछ मांगे बिना निष्काम भाव से उसको याद करो तो वे भक्त के ऋणी हो जाते हैं। प्रभु से कुछ न मांगने वाले एक भक्त को प्रभु दिखाई नहीं देते थे जबकि दूसरे सभी बोलते देखो कितनी सुंदर प्रतिमा है। इस बात को लेकर उसकी व्याकुलता पर प्रभु ने किसी भक्त के माध्यम से उसको संदेश दिया कि फलां मार्ग पर चले जाओ, भक्त चला गया तो रास्ते में भगवान कोढ़ी बनकर बैठ गए और उसके पांव पकड़कर बोले कि एक बार बोल दो ये कोढ़ी ठीक हो जाए। भक्त बोला कि मुझे भगवान प्रतिमा में भी दर्शन नहीं देते मुझ जैसे के बोलने से क्या होगा। कोढ़ी रूपी भगवान बोले बस एक बार बोल दो। भक्त ने पीछा छुड़ाने हेतु जब बोला तो चमत्कार हो गया क्योंकि कोढ़ी तुरंत ठीक हो गया तथा दर्शन भी होने लगे अर्थात उसके ऋणी भगवान उसको कुछ देकर उसको मुंह दिखाने के काबिल हो गए थे।
स्वामी जी ने प्रभु की कृपा पाने का अचूक नुस्खा देते हुए कहा कि प्रभु से कुछ मांगते समय दृष्टि प्रभु की दयालुता पर होनी चाहिए कर्म को नजरअंदाज कर दो। जैसे भरत मिलाप से पूर्व श्रीराम के पास जाते समय जब भरत को माता कैकई के कर्म स्मरण हो आए तो उसकी चाल में धीमापन आ गया लेकिन जब उसने प्रभु के कृपालु स्वभाव का स्मरण किया तो उसके पांच तेजी से उठने लगे अर्थात सावधान प्रभु के समक्ष जाते समय अपने कर्मों से ध्यान हटाकर नजर को प्रभु के दयालु स्वभाव पर रखो। इस मौके पर गोशाला प्रधान बलराम सहारण, सरपंच बाबूराम गैदर, जोतराम ओढ़ां, महेंद्र नीमिवाल, रामेश्वर कूकना, महेंद्र गैदर, ओम सुमरा, बद्रीप्रसाद गैदर, उदयसिंह राजपूत, हंसराज निमीवाल, भागाराम नेहरा, मांगेराम कूकना, अमर सिंह, कृष्ण कूकना, असीर गैदर, दुलीचंद नेहरा और सेवादारों सहित अनगिनत महिला पुरूष श्रद्धालु मौजूद थे।

04 April 2017

प्रवेश उत्सव के तहत विद्यार्थियों ने निकाली जागरूकता रैली

ओढ़ां
राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओढ़ां के विद्यार्थियों द्वारा प्रवेश उत्सव सत्र 2017-18 के अंतर्गत गांव में जागरूकता रैली निकाली गई।
रैली में शामिल विद्यार्थियों ने ऊंची आवाज में नारे लगाकर आम लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हुए आमजन से अपील की कि वे अपने बच्चों को राजकीय विद्यालयों में दाखिला दिलवाएं। विद्यार्थियों ने लोगों का जागरूक करते हुए सरकारी विद्यालयों में सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं से अवगत करवाया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओढ़ां से निकली यह जागरूकता रैली कालांवाली रोड, नवोदय रोड, हरिजन बस्ती, पुरानी अनाज मंडी, थाना रोड, जीटी रोड सहित गांव की अलेक गलियों व मोहल्लों से होते हुए वापिस विद्यालय पहुंची। इस रैली में प्रिंसिपल सुभाष कुमार फुटेला, मुख्य शिक्षक रिछपाल सिंह गोदारा, डीपीई बलविंद्र सिंह, अजायब सिंह जलालआना, जगदीप सिंह, श्रीओम शर्मा, सतीश शर्मा, राम सिंह कुलरिया और रमेशचंद्र सहित अन्य स्टाफ सदस्य तथा सैकड़ों विद्यार्थी शामिल थे।

रक्तदान शिविर में 66 लोगों ने दिया रक्तदान

ओढ़ां
गांव मलिकपुरा के हाई स्कूल में ग्राम पंचायत व शिव शक्ति ब्लड बैंक द्वारा समस्त गांववासियों के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं सहित कुल 66 लोगों ने रक्तदान किया।
इस अवसर पर सरपंच गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम अपने जन्मदिवस व सालगिरह जैसे विशेष अवसरों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करें। इस अवसर पर सरपंच गुरमीत सिंह के अतिरिक्त ग्राम पंचायत सदस्यों पूर्व सरपंच इकबाल सिंह, मैनेजर रणजीत सिंह व हरविंद्र सिंह, रूपनीत सिंह पटवारी और अध्यापक कुलविंद्र सिंह ने रक्तदान विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान करके हम किसी को नई जिंदगी दे सकते हैं। इस मौके पर शिविर के आयोजन में स्कूल स्टाफ, ग्राम पंचायत सदस्य और अनेक युवाओं सहित अन्य अनेक गांववासियों ने सराहनीय योगदान दिया।

श्रीरामकथा के पात्रों से सीख लेकर सार्थक हो सकता है जीवन : स्वरूपदास

नुहियांवाली की श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला में श्रीरामकथा एवं दुर्लभ सत्संग

ओढ़ां
खंड के गांव नुहियांवाली में समस्त गांववासियों के सहयोग से आयोजित श्रीरामकथा भक्तिमय माहौल में सम्पन्न हो गई लेकिन गांववासियों के विशेष आग्रह पर स्वामी विजयानंद गिरी ने कहा कि दुर्लभ सत्संग का समापन अगले दिन होगा।
श्रीरामकथा के समापन पर हवन यज्ञ और भंडारे में नुहियांवाली और आसपास के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सरपंच बाबूराम गैदर ने सबके सामने मदिरा सेवन को हमेशा के लिए त्याग देने का प्रण लिया तो अन्य अनेक गांववासियों ने भी व्यस्नों को त्यागने की शपथ लेते हुए प्रतिदिन सुबह सबेरे गोशाला में गोसेवा करने का संकल्प लिया।
श्रीरामकथा के समापन पर कथावाचक स्वामी स्वरूप दास ने कहा कि भगवान श्रीराम ही नहीं बल्कि रामकथा के सभी पात्र अपने धर्म का पालन हुए मानवता के कल्याणार्थ आदर्श प्रस्तुत करते हैं। श्रीराम ऐसे आदर्श पुत्र हंै जिनके लिए पिता की आज्ञा सर्वोपरि है। पति के रूप में उन्होंने सदैव एकपत्नीव्रत का पालन किया तथा राजा के रूप में प्रजाहित को सर्वोपरि समझा। वे अत्यन्त तेजस्वी, विद्वान, धैर्यशील, पराक्रमी, दुष्टों का दमन करने वाले, युद्ध एवं नीति कुशल, धर्मात्मा, मर्यादा पुरुषोत्तम, प्रजा वत्सल, शरणागत को शरण देने वाले, सर्वशास्त्रों के ज्ञाता एवं प्रतिभा सम्पन्न हैं। वहीं दूसरी ओर महान पतिव्रता सीताजी वैभव और ऐश्ववर्य को त्याग पति संग वन को गई तथा भातृप्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर लक्ष्मण भी साथ गए। भरत ने स्वयं की बजाय बड़े भाई की पादुका सिहांसन पर प्रतिष्ठित कर सेवक के रूप में राज किया। कौशल्या ने कैकई पुत्र भरत पर राम समान स्नेह लुटाते हुए आदर्श माता की भूमिका निभाई और हनुमानजी आदर्श भक्त हैं तथा रावण का चरित्र बताता है कि अहंकार पतन का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि उक्त पात्रों से सीख लेकर नि:संदेह मानव जीवन सार्थक हो सकता है।
इस अवसर पर गोशाला प्रबंधक समिति के अध्यक्ष बलराम सहारण, महेंद्र नीमिवाल, रामेश्वर कूकना, महेंद्र गैदर, ओम सुमरा, बद्रीप्रसाद गैदर, उदयसिंह राजपूत, हंसराज निमीवाल, भागाराम नेहरा, मांगेराम कूकना, अमर सिंह, कृष्ण कूकना, असीर गैदर और दुलीचंद नेहरा आदि ने श्रीरामकथा के समापन पर हजारों श्रद्धालुओं तथा दोनों स्वामी जी को बधाई व धन्यवाद देते हुए श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर कथास्थल करतल ध्वनि से गूंज उठा। इस मौके पर श्रीरामभक्त हनुमान गोशाला के सेवादारों सहित अनगिनत महिला पुरूष श्रद्धालु मौजूद थे।